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15 अगस्त की शुभकामनाएं बस्तर पत्रकार संगठन के द्वारा दी गई

🔴पयवस्त रहसजर से
उम्मीदें ए बहार रख
सींचा है जिसने खून से
उस चमन को संभाल रख 🔴
वरिष्ठ पत्रकार साथियों, मीडिया जगत के प्रबुद्ध जन
आप सभी को 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
15 अगस्त का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह दिन हमारे स्वाभिमान, हमारे संघर्ष और हमारी पहचान का प्रतीक है। 15 अगस्त 1947 को भारत की पावन धरा से पराधीनता की जंजीरें टूटी थीं और हमें अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिली थी।
साथियों, आज जब हम आजाद भारत की खुली हवा में सांस ले रहे हैं, तो हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह आजादी हमें ऐसे ही मिली है। इसके पीछे उन अनगिनत महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों और वीर जवानों का त्याग है, जिन्होंने इस देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
आज का दिन हमें याद दिलाता है उस गूंजते हुए नारे की, जो कभी देश के कोने-कोने में गूंजा था—”देश आजाद होना चाहिए!” इस एक सपने के लिए हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद-ए-आजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे अनेकों वीर-वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। हमारे वीर जवानों ने अपने शरीर के खून का एक-एक कतरा बहाया, तब जाकर आज का यह स्वतंत्र भारत का स्वरूप हमारे सामने खड़ा हो पाया है।
साथियों, भारत की असली ताकत इसकी ‘विभिन्नता में एकता’ है।
अलग-अलग भाषाएं, अलग-अलग पहनावे, और विविध संस्कृतियों के बावजूद, जब बात तिरंगे की आती है, तो पूरा देश एक स्वर में धड़कता है। आजादी के बाद से लेकर आज तक, भारत ने शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और आर्थिक क्षेत्र में जो निरंतर तरक्की की है, वह इसी एकता का परिणाम है।
एक पत्रकार के रूप में हमारी जिम्मेदारी एक जिम्मेवारी के रूप में चुनौती है आज हमारे समाज में देखा जा रहा है की आम आदमी से लेकर नेता तक और अफसर से लेकर पुलिस प्रशासन तक कही न कही अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्ययों से विमुखता नजर आती है सभी को अपनी जवाबदारी तय करना होगा
आज पत्रकार कल्याण संगठन के मंच से बोलते हुए, मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि आजादी सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं थी, यह विचारों की स्वतंत्रता भी थी।
देश को अंग्रेजों से आजादी तो हमारे महापुरुषों ने दिला दी, लेकिन लोकतंत्र और इस आजादी को अक्षुण्ण रखने की जिम्मेदारी आज हमारी है।
एक पत्रकार के रूप में, हमारी ‘कलम’ और हमारी ‘आवाज’ ही
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। सच को निडरता से सामने लाना, समाज को सही दिशा दिखाना और एकता-अनेकता के इस ताने-बाने को मजबूत बनाए रखना ही हमारे शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आइए, आज के इस पावन दिन पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने काम, अपनी ईमानदारी और अपनी पत्रकारिता के माध्यम से देश की एकता, अखंडता और तरक्की में अपना सर्वोत्तम योगदान देंगे।
हम आपको बताते चलें की दूसरी तरफ देश के कोने कोने मे चाहे शहर हो कस्बा हो ग्रामीण अंचलों में एवं ग्रामों की ग्राम पंचायतो शासकीय कार्यालय और स्कूलों में आजादी की पावन बेला का उत्सव मनाया गया .. बस्तर जगदलपुर मे भी पत्रकार कल्याण संगठन के कार्यालय में सभी पत्रकार बंधुओ के द्वारा राहगीरों बच्चो को मिष्ठान वितरण किया गया वहीं दूसरी तरफ जिला सुकमा के छिंदगड़ ब्लॉक के चीतलनार आश्रम में स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर भव्य आयोजन किया गया इस आयोजन की रूपरेखा और भव्य आयोजन की बागडोर अधीक्षक शिवा कुमार के द्वारा आयोजित किया गया उनके उत्कृष्ट कार्य और आश्रम की खूबसूरती रखरखाव और आश्रम के प्रति समर्पण के लिए जिला प्रशासन की तरफ से उन्हें सम्मानित कर मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया पूर्व में भी चितलनार आश्रम के अधीक्षक शिवा कुमार के द्वारा इसी तरह अपने आश्रम में सांस्कृतिक प्रोग्राम हो या शाला प्रवेश कार्यक्रम हो या हॉस्टल की खूबसूरती में चार चांद लगाने जैसे उत्कृष्ट कार्य हो… हमेशा अग्रणी रहे हैं और उन्हें समय-समय पर विभागीय अधिकारियों के द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है
जय हिंद! जय भारत!
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