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जगदलपुर नगर निगम बना अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार का मरकज

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बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में नगर निगम की लचर कार्यशैली, प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। शहर की मूलभूत समस्याओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर नागरिकों में गहरा आक्रोश है। निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर का ऐतिहासिक गंगा मुंडा तालाब आज अपनी अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
​लाखों-करोड़ों के बजट के बावजूद तालाब में जलकुंभी और गंदगी का साम्राज्य
​शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक गंगा मुंडा तालाब के सौंदर्यीकरण और रखरखाव के नाम पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपये के बजट का आवंटन होता है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। वर्तमान में पूरा तालाब जलकुंभी, जंगली झाड़ियों, कचरे और भारी गंदगी से पटा पड़ा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि छठ पूजा जैसे विशेष पर्वों या बड़े अधिकारियों के दौरों के समय दिखावे के लिए कुछ दिनों की सफाई कर खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन पर्व बीतते ही यह ऐतिहासिक धरोहर फिर से उपेक्षा का शिकार बन जाती है।
​टैक्स वसूली में सख्ती, लेकिन आम जनता से अभद्रता
​एक तरफ जहां विकास कार्य ठप पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम द्वारा नागरिकों से मकान कर, जल कर (नल टैक्स) और अन्य स्थानीय करों की वसूली बेहद कड़ाई से की जा रही है। वार्डवासियों का आरोप है कि टैक्स वसूलने आने वाले कर्मचारी आम जनता के साथ कई बार अभद्र और बेतुका व्यवहार करते हैं। समय पर टैक्स चुकाने के बावजूद शहरवासियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
​निगम के वाहनों में यातायात नियमों की सरेआम धज्जियां
​शहरभर में कचरा उठाने वाली नगर निगम की गाड़ियां बिना फिटनेस, बिना बीमा (Insurance), बिना पीयूसी (PUC) और कई वाहनों में नंबर प्लेट तक के बिना संचालित हो रही हैं। यातायात और सुरक्षा मानकों की यह अनदेखी गंभीर हादसों को न्यौता दे रही है। यदि ऐसी लापरवाही से भरी गाड़ियों से कोई दुर्घटना हो जाए, तो वाहन की पहचान करना तक मुश्किल हो जाएगा।
​जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी स्थिति पर कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। शहरवासियों ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि नगर निगम की इस लचर व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि शहर की सुंदरता और जनता के अधिकारों की रक्षा हो सके।
​”नमस्कार, मैं हूं [आपका नाम]। आज हम बात कर रहे हैं बस्तर के मुख्यालय जगदलपुर की, जहां का नगर निगम इन दिनों अपनी ही लापरवाही, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के दलदल में फंसता नजर आ रहा है। एक तरफ ऐतिहासिक धरोहरें बदहाली पर आंसू बहा रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता से टैक्स वसूलने में सख्ती दिखाने वाला निगम खुद कानून की धज्जियां उड़ा रहा है। देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट…”

​”तस्वीरें बयां करने के लिए काफी हैं कि जगदलपुर का ऐतिहासिक गंगा मुंडा तालाब आज किस कदर बदहाल है। लाखों-करोड़ों रुपये के सौंदर्यीकरण और मेंटेनेंस के बजट का दावा करने वाला नगर निगम शायद यह भूल गया है कि यह तालाब शहर की शान है। हालत यह है कि पूरा तालाब जलकुंभी, झाड़ियों और कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। हां, जब कोई बड़ा त्योहार जैसे छठ पूजा आती है, तो प्रशासन जागता है—सिर्फ इसलिए ताकि कैमरे पर काम होता हुआ दिखाई दे। लेकिन त्योहार खत्म होते ही फिर वही लापरवाही और गंदगी का आलम शुरू हो जाता है।
​”तालाब की बदहाली तो एक बानगी है। जनता से मकान और नल का टैक्स वसूलने में नगर निगम के नुमाइंदे पूरी मुस्तैदी दिखाते हैं, और टैक्स मांगने के नाम पर आम जनता से अभद्रता करने से भी गुरेज नहीं करते। लेकिन हैरानी की बात यह है कि खुद नगर निगम के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। शहर में कचरा ढोने वाली गाड़ियां बिना फिटनेस, बिना बीमा, बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और कई तो बिना नंबर प्लेट के दौड़ रही हैं। अगर इन गाड़ियों से कोई हादसा हो जाए, तो प्रशासन के पास जिम्मेदारी तय करने का भी कोई जरिया नहीं बचेगा।”
​एंकर आउट्रो (कैमरे की तरफ देखते हुए):
​”सवाल बड़ा यह है कि क्या नगर निगम के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं? आखिर कब तक जनता के टैक्स के पैसों की इस तरह बर्बादी होती रहेगी और शहर की धरोहरें दम तोड़ती रहेंगी? इस लापरवाही पर अब जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को कड़ा संज्ञान लेना ही होगा।” Janvarta-24 news

संपादक /संवाद दाता

समीर सल्फी

बस्तर जगदलपुर।

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